मेरा घर – Essay on My Home in Hindi

कक्षा 6 से 12 तक


मेरा नाम अदित्य है मै उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के पास एक छोटा सा गाँव उज्जवल पुर मे रहता हूँ गाँव के बिचो – बिच में हमारा घर हैं। हमारा घर बहुत ही सुन्दर है यह दो मंजीला है तथा वह सफेद रंग में रंगा हैं जिसकी वजह से वह और भी सुन्दर दिखता हैं

हमारे घर में 6 कमरे है। और एक पुजा घर, एक रसोई ,एक सौचालय, एक नहान घर तथा एक छोटा सा झोपडी है जिसमें हमारी गाय और उसका बछडा रहता हैं। हमारे घर के ठीक सामने सडक हैं जो पुरे गाँव में जाता हैं हमारे घर के ठीक बगल में हमारी खेत है

जिसमें सरसों बोया हुआ हैं हमारें घर में ढेर सारे सदस्य है जिसमें हमारे दादा दादी, बडें पापा बडी मम्मी, पापा मम्मी, चाचा चाची और उनके बच्चें हम सभी मिलकर रहतें हैं हमारे घर में एक कुतीया भी हैं जिसके 4 बच्चें भी है। हम लोग उसको खूब खेलाते हैं

हमारे दादा गाँव के प्रधान भी है इसलिए हमारे घर पर गाँव के सभी लोग आते-जाते रहते है हमारे घर में हर चिज की व्यवस्था हैं हमारे घर में ही पम्पू सेट हैं हम लोग तथा गाँव के सभी बच्चें हम सब मिलकर उसमें खुब नहाते हैं।

हमारा घर गाँव का आदर्श घर है इसलिए गाँव के सभी लोग अपनी-अपनी समस्या को लेकर हमारे घर पर आते है और हमारे दादा जी उनकी समस्या का निवारण करते है हमारा गाँव वाराणसी के नजदीेक होने की वजह से हमारे गाँव तथा हमारे घर पर हमेशा बिजली रहती है जिसकी वजह से हम रात में अच्छे से पढाई करते हैं हमारे बडे पापा गाँव के ही स्कूल में प्रधानाचार्य है।

और हम तथा गाँव के सभी बच्चें उसी स्कूल में पढते हैं हमारे पापा पेशे से डाक्टर है उनका गाँव में ही एक हास्पिटल हैं। हमारे चाचा जी भारतीय सेना में हैं जो देश की सेवा में कार्य कर रहे है हमें तथा हमारे सभी गाँव वालो को उनपर नाज हैं।

हमारी बडी मम्मी गाँव के आँगनबाडी में कार्य करती हैं तथा समय-समय पर गाँव में पोलियो का तथा नवजात बच्चों को सुई का टीका लगाती है मेरी मम्मी तथा चाची घर का सारा काम सम्भालती हैं तो दादी गाँव मजदूरो के साथ खेती का काम सम्भालती हैं।

हमारे घर वाले गाँव वालो के साथ मिलकर गाँव की तरक्की के लिए काम करते हैं। और शायद इसीलिए हमारा घर गाँव का आदर्श घर कहलाता हैं। हम लोग बगीचें में खेलते हैं शाम को हम दादा जी के साथ बाजार जाते है और बहुत सारा सामान खरीद कर लाते है।

हम अपने लिए टाफी और बिस्कूट खरीद कर लाते है और हम सब मिलकर खाते हैं। रात में हम पढाई करते है और पढाई करने के बाद हम दादा या दादी के साथ कहानियाँ सुनते है फिर सभी एक साथ मिलकर खाना खाते है। और फिर सो जाते है सुबह उठते ही हम अपने घर की सफाई में जुट जाते हैं हमें हमेंशा अपने घर की सफाई करना चाहिए और उसका देख रेख करना चाहिए। क्यो की हम जिसकी शरण में है हमें उसका ख्याल रखना चाहिए।

हम हर त्योहार पर अपने घर को सजाते है खासकर दिवाली पर हम अपने घरो की साफ सफाई करते है तथा उसका रंगाई पुताई भी करते है और उस दिन हम अपने घरो को दीप तथा लाईट से सजाते है और उस दिन हमारा घर काफी सुन्दर लगता हैं।

निष्कर्ष-

दोस्तो आज हम आपको निबन्ध-मेरा घर कक्षा 6 से 12 तक के बारे में सबकुछ बता दिया है उम्मीद है की आप को यह निबंध पसंद आया होगा यदि आप को इस निबंध में कुछ कमी लगती है तो कमेंट में जरूर बताये।
धन्यवाद

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